मोटी आंटी के आँखों का जादू:Hindi sex story

मोटी आंटी की चूत और गांड की गर्म कहानी- मोटी आंटी के आँखों का जादू-Hindi sex story.


परिचय और शुरुआती आकर्षण
दोस्तों, मैं संजय हूं, बलरामपुर का रहने वाला एक 25 साल का जवान लड़का। मेरा कद-काठी ठीक है और लंड की लंबाई 7.5 इंच है, जो मोटाई में 3 इंच रखता है, हमेशा उत्साहित रहने को तैयार। मैं इंजीनियर हूं, लेकिन जिंदगी का असली मजा मुझे उन मोटी-ताजी औरतों की कल्पनाओं में मिलता है जो देखते ही लंड को तनाव दे दें। मेरे घर के ठीक सामने वाले मकान में एक मोटी आंटी रहती थीं, जिनका नाम राधा आंटी था। उनकी उम्र लगभग 38-40 साल की होगी, रंग सांवला सा, लेकिन वह मोटी गांड और फुटबॉल जैसे भारी-भरकम चूचियां किसी को भी पागल बना दें। उनकी बालकनी मेरी बालकनी के बिल्कुल आमने-सामने थी, इसलिए रोजाना हाय-हैलो और थोड़ी बहुत नजरें मिलना आम बात हो गई थी। लेकिन सबसे ज्यादा मुझे उनकी काली, बड़ी-बड़ी आंखें भाती थीं – वे आंखें जैसे कोई गहरा राज छिपाए हुए हों, कामुक संकेत देती हों, और देखने वाले को सीधे दिल में उतर जाएं।

पहली नजर का जादू और आंखों का खेल
एक शाम की बात है, जब आंटी हरी रंग की साड़ी पहने बालकनी में खड़ी हुईं। उनका ब्लाउज डीप नेक वाला था, जिसमें से चूचियों की गहरी घाटी साफ झलक रही थी, और ब्रा थोड़ी सी स्लिप हो चुकी थी। मेरी नजरें खुद-ब-खुद उनकी चूचियों पर जम गईं, मैं उन्हें घूरने लगा जैसे कोई भूखा शेर मांस को देखे। तभी अचानक उनकी आंखें मेरी आंखों से टकराईं। उन आंखों में एक अजीब सी चमक उभर आई, जैसे वे कह रही हों – “तू मुझे ताड़ रहा है ना, देख ले अच्छे से!” मैंने अपनी आंखों से ही जवाब दिया, जैसे कह रहा हूं कि हां, तुम्हारी खूबसूरती पर फिदा हूं। आंटी मुस्कुराईं, उनकी आंखें थोड़ी सिकुड़ीं हंसी से। फिर वे धीरे-धीरे झुकने लगीं, जिससे चूचियां और ज्यादा उघरने लगीं, ब्रा का किनारा साफ दिखने लगा। उनकी आंखें अब लाल हो चली थीं, जैसे उनमें आग लग गई हो, और मेरी आंखें भी उसी आग में जलने लगीं। मेरा लंड पैंट में तनकर फड़फड़ा उठा, मैंने नीचे हाथ डालकर उसे सहलाना शुरू कर दिया। आंटी ने वह हरकत देख ली, उनकी आंखों में एक शरारती हंसी चमक उठी, जैसे कह रही हों – “तेरा लंड तो कमाल का लग रहा है, और तनाव ले ले!” मेरी सांसें तेज हो गईं, लगा जैसे उनकी आंखें मुझे चुंबन दे रही हों, गले लगा रही हों। मैं सोच रहा था कि ये आंखें कितनी बोलती हैं, कितना जादू भरा है उनमें!

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बाथरूम में आंखों की यादों का तूफान
मुझे अब और बर्दाश्त न हुआ, मैं सीधा बाथरूम की ओर भागा। दरवाजा बंद किया और पैंट नीचे सरका दी। उनकी उन काली आंखों की चमक याद करके लंड को मुट्ठी में पकड़ लिया, जोर-जोर से हिलाने लगा। “आंटी, तेरी आंखें मुझे मार डालेंगी, कितनी सेक्सी हैं!” सोचते हुए झटके तेज कर दिए। उनकी मुस्कान, वो लालिमा, वो संकेत – सब दिमाग में घूम रहा था। दो मिनट भी न लगे, मेरा गर्म माल बाहर छूट गया, लेकिन मन को सुकून न मिला। उनकी आंखों का जादू अभी भी मेरे खून में दौड़ रहा था। रात को सोने की कोशिश की, लेकिन नींद न आई, सपनों में वही आंखें नाच रही थीं, चूचियां झूल रही थीं।

दूसरे दिन का इंतजार और आंखों के इशारे
अगले दिन सुबह से ही मैं बालकनी में खड़ा उनके आने का इंतजार करने लगा। एक घंटे बाद वे आईं, लाल साड़ी में लिपटी हुईं, और उनकी आंखों में कातिल हंसी चमक रही थी। हम दोनों आंखों ही आंखों में बात करने लगे, जैसे कोई गुप्त भाषा हो। मैंने इशारा किया कि पीछे मुड़ो, अपनी गांड दिखाओ। वे मुड़ीं, मोटी गांड साड़ी में कसी हुई, पैंटी का निशान साफ दिख रहा था, बेहद सेक्सी लग रही थी। फिर वे पीछे मुड़कर आंखों से देखने लगीं – “ये चाहिए तुझे, बोल?” उनकी आंखें उत्साह से चमक रही थीं। मैंने आंखों से हामी भरी। वे शरमा गईं थोड़ा, लेकिन फिर आंखें घूरने लगीं, जैसे कह रही हों – “और देख ले अच्छे से!” मेरा लंड फिर से तन गया, मन किया बालकनी से कूदकर उनके पास पहुंच जाऊं। मैंने आंखों से मोबाइल नंबर मांगा, उन्होंने छोटे कागज पर लिखकर मेरी बालकनी में फेंक दिया। उनकी आंखों में जीत की चमक थी, जैसे बोल रही हों – “अब तू मेरा हो गया!” मैं आंखों से हंस पड़ा।

फोन पर आंखों की बातें और रात का इंतजार
शाम ढली तो मैंने नंबर पर कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन न उठाया। थोड़ी देर बाद मैसेज आया – “पति के साथ हूं अभी, बाद में बात करेंगे।” रात के 12:30 बजे उनका कॉल आया। मैंने सबसे पहले कहा – “आंटी, तेरी आंखें कमाल की हैं, देखकर पागल हो गया।” वे हंस पड़ीं। हम फोन पर चूत, गांड, चूचियों की गर्म बातें करने लगे। मैंने गांड मारने की इच्छा जताई, पहले मना किया लेकिन मेरी जिद पर राजी हो गईं। उन्होंने बताया कि पति कल तीन दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। “कल 11:30 बजे पीछे के गेट से आ जाना, खुला रखूंगी।” फोन रखा तो मेरा लंड तना हुआ था। रात को उनकी आंखों को याद करके फिर मुठ्ठी मार ली। सुबह उठा तो लंड फिर तैयार।

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घर में प्रवेश और पहला स्पर्श
सुबह उनका मैसेज आया – “पति निकल गए, जल्दी आ।” मैं पीछे के रास्ते से पहुंचा, गेट खुला था। अंदर घुसा तो आंटी ब्लैक ब्रा और पैंटी में खड़ी मुस्कुरा रहीं, उनकी आंखों में आग सुलग रही थी – “आखिरकार आ गया तू!” उन्होंने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और आंखों के इशारे से मुझे बेडरूम ले गईं। मेरे सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ अंडरवियर बचा। मेरा तना लंड देखकर उनकी आंखें फूल गईं – “वाह, कितना बड़ा और मोटा!” उन्होंने हाथ फेरा, फिर अंडरवियर उतार दिया। मुझे बेड पर धकेला और लंड मुंह में भर लिया, आंखें ऊपर करके मुझे घूर रही थीं। मैं उनकी आंखों में पूरी तरह डूब गया, सिसकारियां निकलने लगीं।

चूचियों और चूत का स्वाद
10 मिनट तक लंड चूसा, मैं झड़ने वाला था लेकिन रुका। उन्होंने ब्रा उतारी, भारी चूचियां हवा में झूलने लगीं। उनकी आंखें बोल रही थीं – “दबा इन्हें जोर से!” मैंने दोनों हाथों से मसलना शुरू किया, वे इतनी बड़ी थीं कि हाथ भर न आईं। आंटी की आंखें बंद हो गईं सुख से, मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं। फिर चूत में उंगली डाली, गीली हो चुकी थी, कामरस की खुशबू आ रही थी। मैंने चूत चाट ली, जीभ अंदर डाली। आंटी ने मेरा मुंह चूत पर दबा दिया, उनकी आंखें खुलीं और मुझे घूरने लगीं – “और चाट, मजा आ रहा!” मैंने कॉन्डम चढ़ाया, चूत के छेद पर लंड सेट किया और एक झटके में पूरा अंदर। चोदना शुरू किया, बीच-बीच में चूचियां दबाईं और चूसीं। उनकी आंखें आनंद से चमक रही थीं। 15 मिनट बाद उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

गांड का पहला मजा और आंखों की अपील
अब गांड का नंबर। मैंने आंटी को पलटा, गांड के छेद पर लंड सेट किया। धक्का मारा तो चीख निकल गई। रुका। उनकी आंखें डर से भरीं – “धीरे, पति का छोटा है!” थूक लगाया, उंगली से सहलाया। फिर धीरे-धीरे आधा अंदर। पूरी तरह लेट गया उनके ऊपर, चूचियां मसलते हुए पीठ चाटी। आंखों में देखा – वे अब सुख से चमक रही थीं। पूरा लंड अंदर चला गया, गांड चोदना शुरू। कुछ देर में उन्हें भी मजा आने लगा, आंखें बंद करके सिसकारियां। 7 मिनट में कॉन्डम में माल भर दिया।

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तेल वाला दूसरा राउंड और लंबा सुख
हम लेटे रहे। फिर लंड चुसवाया। 10 मिनट में फिर तना। तेल की शीशी लाईं, गांड चिकनी की। पेट के बल लेटीं, आंखें पीछे से अपील – “आ अब!” पीछे से घुसाया, पहले दर्द लेकिन फिर ठीक। तेज धक्के दिए, उनकी आंखें आईने में चमक रही थीं। 10 मिनट चोदा, फिर मुंह में चुसवाया और आखिर में गांड में बिना कॉन्डम माल डाला। गांड से टपक रहा था।

तीन दिनों का बेमिसाल जल्लोष
पहले दिन तीन बार चोदा – चूत, गांड, मुंह। दूसरे दिन सुबह चूत चाटकर शुरू, दोपहर डॉगी स्टाइल गांड, रात ऊपर बैठकर। तीसरे दिन हर पोज आजमाया। हर बार आंखें मिलीं, जादू चला। अब भी बालकनी में आंखों का खेल, रातें गर्म। उनकी आंखें हमेशा का राज।
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मोटी आंटी की चूत और गांड की गर्म कहानी- मोटी आंटी के आँखों का जादू-Hindi sex story.

सामान्य प्रश्न (FAQ)

1. क्या ये कहानी सच्ची है?
हां, ये मेरी जिंदगी की सच्ची घटना है। सब कुछ वैसा ही हुआ जैसा लिखा।

2. आंटी की उम्र कितनी थी?
लगभग 38-40 साल। लेकिन फिगर इतना हॉट कि उम्र का अंदाजा न चला।

3. पहली बार कितनी देर चुदाई चली?
पहले दिन करीब 1 घंटा, चूत-गांड दोनों।

4. गांड में दर्द तो न हुआ?
शुरू में हां, लेकिन तेल लगाकर मजा आया। आंटी भी बाद में मांगने लगी।

5. कंडोम हमेशा यूज किया?
ज्यादातर हां, लेकिन आखिरी राउंड में बिना।

6. आंटी का फिगर कैसा था?
मोटी, चूचियां 38D, गांड 44 इंच। परफेक्ट।

7. अब भी चुदाई होती है?
हां, मौका मिले तो रात को मिलते हैं।

8. आंखों का जादू क्या मतलब?
उनकी आंखें इतनी कामुक कि बिना बोले सब बता दें।

9. कितनी बार झड़े?
तीन दिनों में 12 बार से ज्यादा।

10. कोई रिस्क तो न था?
नहीं, पति बाहर था। गेट बंद रखा।

11. कहानी और पढ़ें कहां?
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12. अगली कहानी कब?
जल्दी, आपकी डिमांड पर।

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