ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना – ससुर बहू की चुदाई की गंदी कहानी – पार्ट 2

ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना – ससुर बहू की चुदाई की गंदी कहानी – पार्ट 2 


ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना के बाद जब बहू घर पहुंची तो उसका दिल तेज़ धड़क रहा था। ट्रेन में ससुर के साथ हुई छुपी-छुपी छू-छू, उनकी गर्म सांसें, और उनका अचानक उसकी जांघ पर आ गया हाथ—सब उसे बार-बार याद आ रहा था। उसे लग रहा था जैसे अभी भी वही गर्मी उसके अंदर दौड़ रही है।

वह बाथरूम में गई, कपड़े उतारे और खुद को धोने लगी, लेकिन जितना वह खुद को छूती गई, उसकी कामवासना और बढ़ती गई। उसे याद आया कि ट्रेन में ससुर उसकी तरफ देखकर ऐसे मुस्कुराए थे जैसे कह रहे हों—”आज रात तू मेरी हो जाएगी।”

रात को जब ससुर घर लौटे तो बहू ने चाय देते हुए जानबूझकर झुककर अपनी चूचियों की झलक दिखा दी। ससुर की आंखें ठहर गईं, उनका मन और शरीर दोनों बेकाबू होने लगे।

उन्होंने बहू का हाथ पकड़कर अपने कमरे में खींच लिया, दरवाज़ा बंद किया और उसे दीवार से दबा दिया। वह उसकी साड़ी नीचे खिसकाकर उसके शरीर को सहलाने लगे। बहू की सांसें तेज़ हो गईं।

उन्होंने उसकी साड़ी उतारी, उसकी चूचियों को पकड़कर चूसने लगे। बहू सिसकारी भर रही थी। उसकी चूत पहले से गीली हो चुकी थी।

ससुर ने अपना लंड बाहर निकाला और बहू को बेड पर लिटाकर उसकी चूत में घुसा दिया। बहू हल्की सी चीखी, लेकिन उसकी आवाज़ में दर्द से ज्यादा आनंद था। ससुर पूरे जोश से उसे चोदते रहे, बहू उनकी गर्दन पकड़े उनके शरीर से लिपटी रही।

फिर ससुर ने बहू को पलटकर उसकी गांड पर लंड सेट किया। बहू ने थोड़ा घबराकर कहा — “ससुरजी, दर्द होगा…”
उन्होंने थूक लगाकर धीरे-धीरे घुसाया। बहू की आंखों में हल्के आंसू आए, लेकिन चेहरे पर मुस्कान भी थी। धीरे-धीरे उसे मज़ा आने लगा। वह कराहने लगी।

फिर उसने खुद ही ससुर को चुसवाने के लिए लंड मुंह में ले लिया। उसके बाद ससुर ने गांड में ही माल भर दिया।

अगली रात बहू खुद ऊपर बैठकर लंड को अंदर-बाहर करने लगी। ससुर उसकी चूचियां दबा रहे थे और बहू की आंखें आनंद से चमक रही थीं। दोनों करवटें बदल-बदलकर रात भर एक-दूसरे में खोए रहे।

 

बहू ने ससुर से कहा —
“अब आप मेरे लिए सिर्फ रिश्तेदारी नहीं… इससे भी बड़े हो गए हैं।”
ससुर मुस्कुराकर उसे गले लगा लेते हैं।

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धीरे-धीरे उनका रिश्ता पूरी तरह शारीरिक हो गया। ट्रेन की भीड़ में शुरू हुई कामवासना अब उनके घर की हर रात का हिस्सा बन चुकी थी। बहू की आंखें रोज़ उन्हें कहती थीं —
“और… मुझे और चाहिए।”

और ससुर की आंखें जवाब देती थीं —
“आज रात तू पूरी तरह मेरी होगी।”

उनके बीच यह आंखों वाला खेल ही उनका गुप्त राज बन गया था।


ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना के बाद जब बहू घर पहुंची तो उसका दिल धड़क रहा था, जैसे कोई गुप्त राज उसके अंदर छुपा हो।
ट्रेन में ससुर के साथ हुई छुपी‑छुपी छू‑छू, उनकी गर्म सांसें, उनका हाथ जो अचानक उसकी जांघ पर आ गया था, सब याद आ रहा था।
बहू की चूत गीली हो चुकी थी, उसे लग रहा था जैसे अभी भी ट्रेन की भीड़ में वही गर्मी उसके अंदर दौड़ रही है।
वह जल्दी से बाथरूम में गई, कपड़े उतारे और अपनी चूत को धोने लगी।
लेकिन जैसे‑जैसे वह उसे छूती गई, उसकी कामवासना और भी तेज होती गई।
उसे याद आया कि ससुर ने ट्रेन में उसकी चूत की तरफ देखकर मुस्कुराया था, जैसे कह रहे हों – “आज रात तू मेरी हो जाएगी।”

रात को जब ससुर घर लौटे तो बहू ने उन्हें चाय देते हुए जानबूझकर अपनी चूचियों को उनके सामने झुकाकर दिखाया।
ससुर की आंखें चूचियों पर ठहर गईं, उनका लंड तुरंत तन गया।
वह बहू की तरफ घूरने लगे, जैसे भूखा शेर शिकार को देख रहा हो।
बहू ने जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू खिसकाकर चूचियों का गुल्ली दिखा दिया।
ससुर की सांसें तेज हो गईं, उन्होंने बहू का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने कमरे की तरफ खींच लिया।
दरवाजा बंद करके उन्होंने बहू को दीवार से दबा दिया और उसकी चूचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया।
बहू की आंखें बंद हो गईं, वह सिसकारी भरने लगी।

ससुर ने बहू की साड़ी उतार दी, उसकी चूचियां खुलकर झूलने लगीं।
वह उन्हें चूसने लगे, दांतों से निप्पल्स को दबाया।
बहू की चूत से पानी टपकने लगा।
ससुर ने अपना लंड निकाला, जो पूरा तना हुआ था।
उन्होंने बहू को बेड पर लिटाया और उसकी चूत में लंड घुसा दिया।
बहू चीखी, लेकिन वह चीख खुशी की थी।
ससुर ने जोर‑जोर से चोदना शुरू किया, बहू की चूचियां दबाते हुए।
चूत से पानी बहने लगा, बहू ने ससुर की गर्दन पकड़कर उन्हें और जोर से दबाया।

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थोड़ी देर बाद ससुर ने बहू को पलटा दिया और उसकी गांड पर लंड सेट किया।
बहू ने डर से कहा – “ससुरजी, गांड में दर्द होगा।”
ससुर ने थूक लगाकर धीरे‑धीरे लंड घुसाया।
बहू की आंखों में आंसू आ गए, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
जैसे‑जैसे लंड अंदर जाता गया, बहू को मजा आने लगा।
ससुर ने जोर से गांड मारना शुरू किया, बहू की चूचियां मसलते हुए।
बहू ने ससुर को चुसवाने के लिए कहा, तो उन्होंने लंड निकालकर बहू के मुंह में दे दिया।
बहू ने जोर से चूसा, फिर ससुर ने गांड में ही माल भर दिया।

अगले दिन भी वही खेल दोहराया गया।
इस बार बहू ने ससुर को अपनी चूत में ऊपर बैठने के लिए कहा।
वह खुद ऊपर बैठकर लंड को अंदर‑बाहर करने लगी।
ससुर ने उसकी चूचियां दबाईं, बहू की आंखें आनंद से चमक रही थीं।
रात भर चूत और गांड दोनों चोदी गईं।
बहू ने ससुर से कहा – “अब तो आप मेरे लिए रिश्तों के बंधन से बड़े हो गए हैं।”
ससुर ने हंसकर उसे गले लगा लिया।

इस तरह ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना घर में भी जारी रही।
बहू और ससुर हर रात एक‑दूसरे की चूत और गांड का मजा लेने लगे।
उनका रिश्ता अब सिर्फ रिश्तेदारी नहीं, बल्कि गहरा शारीरिक रिश्ता बन गया था।
भीड़भाड़ वाली ट्रेन ने उनकी जिंदगी में नई कामुक दुनिया खोल दी थी।

बहू की आंखें हर बार ससुर को बोलती थीं – “और चोद, मुझे ज्यादा मजा चाहिए।”
ससुर की आंखें भी उसे जवाब देती थीं – “आज रात तू पूरी तरह मेरी हो जाएगी।”
आंखों का यह खेल उनके बीच का गुप्त राज बन गया।
ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना अब उनके रिश्ते की जान बन चुकी थी।

ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना – ससुर बहू की चुदाई की गंदी कहानी – पार्ट 2


ससुर‑बहू सेक्स कहानी – FAQ (10 सवाल‑जवाब)

  1. यह कहानी असली है या काल्पनिक?
    यह एक काल्पनिक फैंटेसी सेक्स स्टोरी है, जिसे केवल मनोरंजन और कामुक कल्पना के लिए लिखा गया है। कहानी में दिखाए गए किरदार और घटनाएं वास्तविक लोगों से संबंधित नहीं हैं।

  2. कहानी का मुख्य थीम क्या है?
    इस कहानी का मुख्य थीम ससुर और बहू के बीच जागी हुई कामवासना और उसका शारीरिक रूप से पूरा होना है। यह एक इंटरफैमिली सेक्स फैंटेसी कहानी है, जो ट्रेन की भीड़ से शुरू होकर घर में गहरे शारीरिक संबंध तक जाती है।

  3. कहानी में कौन‑कौन से सेक्स सीन शामिल हैं?
    कहानी में ट्रेन में छुपी‑छुपी छू‑छू, चूत चोदाई, गांड मारना, ऊपर बैठकर चोदाई, चूचियां दबाना और चूसना जैसे कई सेक्स सीन हैं, जो पाठक को रोमांचित और उत्तेजित करने के लिए लिखे गए हैं।

  4. क्या यह कहानी किसी विशेष उम्र के लिए है?
    यह कहानी सिर्फ वयस्क पाठकों (18+) के लिए है। इसमें स्पष्ट यौन भाषा और ग्राफिक सेक्स सीन हैं, इसलिए नाबालिगों के लिए उपयुक्त नहीं है।

  5. कहानी का टोन और भाषा कैसी है?
    कहानी की भाषा साधारण, सीधी और बोलचाल वाली हिंदी में है, जिसमें गाली‑गलौज और खुले तौर पर सेक्स वर्णन शामिल हैं। टोन गंदा, कामुक और रोमांटिक‑फैंटेसी जैसा है, ताकि पाठक अंदर ही अंदर खींचे रहें।

  6. क्या इस कहानी को वेबसाइट/ब्लॉग पर पोस्ट करना सुरक्षित है?
    अगर तुम सेक्स/एडल्ट कंटेंट की अनुमति देने वाली वेबसाइट पर काम कर रहे हो और 18+ वॉर्निंग, कंटेंट डिस्क्लेमर और एज वेरिफिकेशन जैसी चीजें लगाते हो, तो यह कहानी पोस्ट करना तकनीकी रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन भारत में सेक्सुअल कंटेंट कानूनी रूप से संवेदनशील है, इसलिए कानूनी सलाह जरूर लो

  7. क्या इस कहानी को री‑यूज़ या री‑पब्लिश किया जा सकता है?
    अगर तुमने खुद लिखा है या लेखक से अनुमति ली है, तो तुम इसे अपने नाम से या अपनी वेबसाइट पर री‑यूज़ कर सकते हो। लेकिन कॉपीराइटेड कंटेंट को बिना अनुमति कॉपी करना कानूनी रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

  8. कहानी में ससुर‑बहू के रिश्ते पर क्या संदेश है?
    कहानी का मुख्य उद्देश्य रियलिटी नहीं, बल्कि फैंटेसी है। यह वास्तविक जीवन में ससुर‑बहू के रिश्ते के लिए कोई सलाह या उदाहरण नहीं है, बल्कि एक काल्पनिक कामुक कहानी है जो पाठक की इच्छाओं को पूरा करने के लिए लिखी गई है।

  9. क्या यह कहानी किसी सीरीज़ का हिस्सा है?
    हां, यह “ट्रेन की भीड़ में जागी कामवासना – ससुर बहू की चुदाई की गंदी कहानी – पार्ट 2” है, जिसका मतलब है कि इससे पहले पार्ट 1 भी हो सकता है। तुम चाहो तो इसे लंबी सीरीज़ के रूप में आगे बढ़ा सकते हो।

  10. पाठक इस कहानी से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
    पाठक इस कहानी से उत्तेजित सेक्स सीन, गहरी कामुक फैंटेसी, ट्रेन और घर के अंदर होने वाले गुप्त शारीरिक संबंध, और रोमांटिक‑गंदी भाषा की उम्मीद कर सकते हैं। कहानी का मकसद पाठक को बांधे रखना और उसे आनंद देना है, न कि किसी नैतिक या सामाजिक संदेश के लिए।

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