बारिश, धड़कन और तुम: एक अनकही प्रेम कहानी
Category: Hindi Romantic Story | Reading Time: 15 Mins
यह कहानी है दो ऐसे किरदारों की, जिनकी दुनिया अलग थी, लेकिन नियति ने उन्हें एक ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया जहाँ शब्दों से ज्यादा खामोशियाँ बोलती थीं। समीर, जो शहर की भागदौड़ से दूर अपनी पेंटिंग्स में सुकून ढूंढता था और सानिया, जो अपनी जिंदगी के बिखरे हुए पन्नों को समेटने की कोशिश कर रही थी।
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अजनबी मुलाकात
शिमला की वो सर्द शाम। पहाड़ों पर धुंध की चादर लिपटी हुई थी। समीर अपने कैनवास के सामने बैठा था, लेकिन आज उसका हाथ चल नहीं रहा था। उसे कुछ ऐसा चाहिए था जो उसकी रूह को छू जाए। तभी कैफे का दरवाजा खुला और सानिया अंदर आई। उसके बालों से बारिश की बूंदें टपक रही थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी।
समीर ने उसे देखा और बस देखता ही रह गया। उसने अपनी कूची उठाई और बिना सोचे सानिया का स्केच बनाने लगा। सानिया ने जब यह देखा, तो वह गुस्सा होने के बजाय समीर के पास आकर खड़ी हो गई। “क्या मेरी उदासी इतनी खूबसूरत है कि आप उसे पेंट कर रहे हैं?” उसने पूछा। समीर मुस्कुराया, “खूबसूरती चेहरे में नहीं, उस एहसास में होती है जो आप छुपा रही हैं।”
खामोशियाँ और बातें
अगले कुछ दिनों तक वे रोज उसी कैफे में मिलने लगे। सानिया ने बताया कि कैसे एक पुराने रिश्ते ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। समीर उसे अपनी पेंटिंग्स दिखाता और उसे बताता कि कैसे हर रंग एक जज्बात बयान करता है। धीरे-धीरे उनके बीच एक अनकहा रिश्ता पनपने लगा। वे घंटों पहाड़ियों पर चलते और बिना कुछ कहे एक-दूसरे की मौजूदगी को महसूस करते।
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वो बारिश वाली रात
एक रात जब सानिया समीर के कॉटेज पर गई, तो अचानक तेज तूफान और बारिश शुरू हो गई। सानिया डर गई। समीर ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे शांत किया। “डरने की जरूरत नहीं है, मैं यहाँ हूँ,” समीर ने धीमी आवाज में कहा।
उस रात की तन्हाई और बाहर गिरती बारिश ने उनके बीच की दूरियाँ मिटा दीं। कमरे में जलती मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में सानिया का चेहरा दमक रहा था। उस रात उन्होंने अपनी भावनाओं को और अधिक नहीं रोका। वह रात उनके प्यार की गवाह बनी, जहाँ सिर्फ दो रूहें एक-दूसरे में सिमट गई थीं।
नया सवेरा और गहरा अहसास
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में आई, तो सब कुछ बदल चुका था। सानिया के चेहरे पर अब सुकून था। सानिया ने समीर की बांहों में सिमटते हुए खिड़की से बाहर देखा। “समीर, क्या यह सब एक सपना तो नहीं?” उसने पूछा। समीर ने उसके माथे को चूमते हुए कहा, “अगर यह सपना है, तो मैं कभी जागना नहीं चाहूँगा।”
समीर ने सानिया का हाथ अपने हाथ में लिया और बोला, “तुम्हारी उदासी को रंगों में ढालते-ढालते, कब मैं खुद तुम्हारे रंग में रंग गया, पता ही नहीं चला।” सानिया की आँखों में खुशी के आँसू थे। प्यार की यह बारिश अब उनकी रूह तक उतर चुकी थी, जो कभी खत्म नहीं होने वाली थी।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. क्या यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है?
नहीं, यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक (Fictional) है और मनोरंजन के लिए है।
Q2. क्या कमवासना डॉट कॉम पर ऐसी और कहानियाँ हैं?
जी हाँ, हमारी वेबसाइट पर मराठी और हिंदी भाषा में ऐसी कई रोमांटिक कहानियाँ उपलब्ध हैं।
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